कर्ता कारक
कर्ता कारक -प्रथमा विभक्ति
१. स्वतंत्र कर्ता -किसी क्रिया को करने में कर्ता स्वतंत्र हो, तो उस स्वतंत्र कर्ता में प्रथमा विभक्ति का प्रयोग होता है।
जैसे - हरि पुस्तकं पठति। हरि पुस्तक पढ़ता है।
इस वाक्य में 'हरि क्रिया पद 'पठति ' का स्वतंत्र कर्ता है। अतः हरि में प्रथमा विभक्ति का प्रयोग हुआ है।
सीता गच्छति। अजा चरति। अश्वः धावति।
२. उक्ते कर्तरि प्रथमा - कृति वाच्य में जहाँ कर्ता पद उक्त या कहा गया रहता है वहां तो कृति वाच्य में प्रथमा विभक्ति का प्रयोग होता है।
जैसे - रामः गृहं गच्छति - राम घर जाता है। यहाँ पर राम में प्रथमा विभक्ति का प्रयोग हुआ है।
ऊपर मेंजितने भी वाक्य का प्रयोग हुआ है सब संज्ञा है। लेकिन आप चाहे तो सर्वनाम शब्द रूप , जैसे- मै , तुम , वह - अहम् , त्वम् , सः का प्रयोग कर सकते है
;यहाँ पर इस बात का ध्यान रखे की कर्ता जिस वचन में है उसका क्रिया भी उसी वचन में होगा
कर्ता यदि एक वचन में है तो उसका क्रिया भी एक वचन में होगा।
अहम् गच्छामि , सः गच्छति , त्वम् गच्छसि
ऊपर के वाक्य में अहम् , सः , त्वम् एक वचन कर्ता है इसलिए इनके साथ एकवचन क्रिया - गच्छामि , गच्छति, गच्छसि का प्रयोग हुआ है।
कर्ता यदि द्विवचन में हो तो क्रिया भी द्विवचन में होगा।
आवाम गच्छावः , तौ गच्छतः , युवाम गच्छथः
ऊपर के वाक्य में आवाम , तौ ,युवाम द्विवचन कर्ता है इसलिए इनके साथ द्विवचन क्रिया गच्छावः,गच्छतः, गच्छथः का प्रयोग हुआ है।
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