संप्रदान कारक
संप्रदान कारक -चतुर्थी विभक्ति
दान करते हुए जिसे कोई वस्तु दी जाती है उसे संप्रदान कारक कहते है और उसमे चतुर्थी का प्रयोग होता है
सः भिक्षुकाय अन्नम ददाति- वह भिक्षुक को अन्न देता है
चतुर्थी विभक्ति - भिक्षुकाय
नमः , स्वस्ति आदि शब्दो के योग मे चतुर्थी विभक्ति का प्रयोग होता है
रामाय नमः - राम को प्रणाम
चतुर्थी विभक्ति - रामाय
यदि वाक्य मे रुच , ' धारी ' स्पृहि' धातु का प्रयोग हुआ हो तो वहाँ पर चतुर्थी विभक्ति का प्रयोग होता है
बालकाय मोदकम रोचते - बच्चे को लड्डू अच्छा लगता है
चतुर्थी विभक्ति - बालकाय
सम्प्रदान के साथ (चतुर्थी विभक्ति)
रामः साधवे वस्त्र ददाति-राम साधु को वस्त्र देता है।
माता बालकाय भोजनम् ददाति-माता बालक को भोजन देती है।
रामः सीताय रावणम् हतवान् -राम ने सीता के लिए रावण को मारा।
साधुः पूजाय काष्ठम् आनयति-साधु पूजा के लिए लकड़ी लाता है ।
मोहन: निर्धनेभ्यः अन्नं ददाति-मोहन निर्धनों को अन्न देता है।
बालकाय मिष्टान्नम् रोचते-बालक को मीठा अच्छा लगता है।
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