❝ खवाहिश ❞ नही मुझे ❝ मशहुर ❞ होने की आप मुझे ❝ पहचानते ❞ हो बस इतना ही काफी है अच्छे ने ❝ अच्छा ❞ और बुरे ने ❝ बुरा ❞ जाना मुझे क्यों की जिसकी जितनी ❝ जरुरत ❞ थी उसने उतना ही पहचाना मुझे !!
ज़िन्दगी का ❝ फ़लसफ़ा ❞ भी कितना अजीब है, शामें ❝ कटती ❞ नहीं, और ❝ साल ❞ गुज़रते चले जा रहे हैं !!
एक ❝ अजीब ❞ सी दौड़ है ये ❝ ज़िन्दगी ❞
जीत जाओ तो कई ❝ अपने ❞ पीछे ❝ छूट ❞ जाते हैं, और हार जाओ तो ❝ अपने ❞ ही पीछे ❝ छोड़ ❞ जाते हैं !!
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❝ बैठ ❞ जाता हूं ❝ मिट्टी ❞ पे अक्सर... क्योंकि मुझे अपनी ❝ औकात ❞ अच्छी लगती है !!
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मैंने ❝ समंदर ❞ से सीखा है जीने का सलीक़ा, चुपचाप से ❝ बहना ❞ और अपनी ❝ मौज ❞ में रहना !!
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ऐसा नहीं है कि मुझमें कोई ❝ ऐब ❞ नहीं है पर
सच कहता हूँ मुझमे कोई ❝ फरेब ❞ नहीं है !!
..................... जल जाते हैं मेरे ❝ अंदाज़ ❞ से मेरे ❝ दुश्मन ❞
क्यूं कि एक मुद्दत से मैंने न ❝ मोहब्बत ❞ बदली और न ❝ दोस्त ❞ बदले !!.
................... एक ❝ घड़ी ❞ ख़रीदकर हाथ मे क्या बाँध ली -
❝ वक़्त ❞ पीछे ही पड़ गया मेरे !!
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❝ सोचा ❞ था ❝ घर ❞ बना कर बैठुंगा सुकून से.. पर घर की ज़रूरतों ने ❝ मुसाफ़िर ❞ बना डाला !!!
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❝ सुकून ❞ की बात मत कर ऐ ग़ालिब.... बचपन वाला ❝ इतवार ❞ अब नहीं आता !!
................................ जीवन की ❝ भाग-दौड़ ❞ में -क्यूँ ❝ वक़्त ❞ के साथ रंगत खो जाती है ? हँसती-खेलती ❝ ज़िन्दगी ❞ भी आम हो जाती है..
एक सवेरा था जब ❝ हँस ❞ कर उठते थे हम और आज कई बार बिना ❝ मुस्कुराये❞
ही ❝ शाम ❞ हो जाती है !!
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कितने ❝ दूर❞ निकल गए, रिश्तो को निभाते निभाते..
खुद को ❝ खो ❞ दिया हमने, अपनों को पाते पाते.. लोग कहते है हम ❝ मुस्कुराते ❞ बहोत है, और हम थक गए ❝ दर्द❞ छुपाते छुपाते..खुश हूँ और सबको ❝ खुश ❞ रखता हूँ,
लापरवाह हूँ फिर भी सबकी ❝ परवाह ❞ करता हूँ..
मालूम है कोई मोल नहीं मेरा, फिर भी, कुछ ❝ अनमोल ❞ लोगो से ❝ रिश्ता ❞ रखता हूँ !!
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