कर्मकारक
कर्मकारक मे द्वितीया विभक्ति का प्रयोग होता है
जैसे - सीता रोटी खाती है- सीता रोटिकां खादति
इस वाक्य में ' रोटिकां ' कर्मकारक है , इसलिए इसमें द्वितीया विभक्ति का प्रयोग हुआ है
क्रियाविशेषण में द्वितीया विभक्ति का प्रयोग होता है
कच्छपः मंदम -मंदम चलति। कच्छप धीरे -धीरे चलता है।
सर्वतः , परितः , अभितः , उभयतः , प्रतिः , निकषा , धिक् , अनु , यावत , शब्दों के योग में द्वितीया विभक्ति का प्रयोग होता है।
ग्रामं सर्वतः क्षेत्राणि सन्ति - गांव के चरों ओर खेत है।
गृहम उभयतः वृक्षा सन्ति - घर के दोनों ओर पेड़ है।
विद्यालं निकषा नदी अस्ति - विद्यालय के निकट नदी है।
राष्ट्रस्य अभक्तं धिक् - राष्ट्र के अभक्त को धिक्कार है।
सः पुस्तकं अनुकरोति - वह पुस्तक की नक़ल करता है।
रामः गृहम यावत गमिष्यति - राम घर तक जायेगा
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